अब कलेक्टर गाइडलाइन से जुड़ेगा प्राॅपर्टी टैक्स

अब कलेक्टर गाइडलाइन से जुड़ेगा प्राॅपर्टी टैक्स


दाम बढ़े तो संपत्तिकर भी बढ़ेगा; अपने हिसाब से स्लैब तय पर सकेंगे निकाय


भोपाल । राजधानी समेत प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में कलेक्टर गाइडलाइन में तय प्रॉपर्टी की कीमतों के हिसाब से संपत्तिकर वसूलने की तैयारी हो रही है। इससे हर साल गाइडलाइन में कीमतें बढ़ते ही प्राॅपर्टी टैक्स की राशि में भी इजाफा हो जाएगा। नए फार्मूले में कलेक्टर गाइडलाइन का एक निश्चित प्रतिशत प्राॅपर्टी टैक्स देना होगा।


राज्य सरकार स्लैब तय कर देगी और निकाय अपने हिसाब से उसे लागू करेंगे। फिलहाल प्राॅपर्टी टैक्स की गणना करने के लिए 8 परिक्षेत्र बनाए गए हैं। इसके अलावा आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों को कई भागों में बांटा गया है। हर क्षेत्र के लिए अलग-अलग वार्षिक भाड़ा मूल्य (एनुअल रेंटल वैल्यू) व टैक्स की दरें तय की गईं हैं। लेकिन इसका कोई आधार नहीं है। फिलहाल एनुअल रेंटल वैल्यू का 6 से 10% तक प्राॅपर्टी टैक्स होता है।


कलेक्टर गाइडलाइन में ऐसे होगा वर्गीकरण



  • 4.36 लाख प्रॉपर्टी टैक्स खाताधारक हैं भोपाल में 

  • 10 साल पहले हुआ था प्रॉपर्टी टैक्स में इजाफा

  • 165 करोड़ रुपए है इस साल वसूली का टॉरगेट।

  • 6 से 10% तक प्राॅपर्टी टैक्स होता है एनुअल रेंटल वैल्यू का

  • कलेक्टर गाइडलाइन में प्लॉट को तीन भागों रेसीडेंशियल, कमर्शियल और इंडस्ट्रीयल में बांटा गया है। 

  • रेसीडेंशियल बिल्डिंग को आरसीसी, आरबीसी, टीनशेड और कच्चा कवेलू में बांटा गया है।

  • कॉमर्शियल बिल्डिंग को शॉप, ऑफिस और गो डाउन में बांटा गया है

  • मल्टीस्टोरी बिल्डिंग के दो भाग हैं- रेसीडेंशियल और कॉमर्शियल।

  • एग्रीकल्चर लैंड को चार भागों में सिंचित, असिंचित, रेसीडेंशियल डायवर्जन, कॉमर्शियल डायवर्जन में बांटा गया है।

  • 112 करोड़ रु. प्रॉपर्टी टैक्स वसूला पिछले साल


संपत्तिकर की मौजूदा व्यवस्था- पूरे शहर में कुल 8 परिक्षेत्र बनाए हैं



  • पूरे शहर में कुल 8 परिक्षेत्र बनाए गए हैं। इसमें आठवां परिक्षेत्र इंडस्ट्रीयल है

  • सभी परिक्षेत्र में सीमेंट या लोहे की चादर, कच्चा भवन और खुली व निर्माणाधीन भूमि इन तीन श्रेणियों को आवासीय और व्यावसायिक में बांटा गया है।

  • आवासीय में पक्का भवन की हर परिक्षेत्र में अलग-अलग एनुअल रेंटल वैल्यू तय की गई है  

  • व्यावसायिक भवन को 20 भागों में बांटा गया है। इसमें दुकान और शो रूम अलग-अलग हैं।

  • ऑटोमोबाइल शो रूम की श्रेणी अलग बनाई गई है

  • औद्योगिक परिक्षेत्र में भी आवासीय भवन, दुकान, शो रूम और मॉल के साथ प्राइवेट अस्पताल जैसे वर्गीकरण भी शामिल हैं।


गाइडलाइन से लिंक होने के बाद
सभी परिक्षेत्रों को समाप्त कर सीधे गाइडलाइन का एक निश्चित प्रतिशत प्राॅपर्टी टैक्स लिया जाएगा। प्रतिशत का निर्धारण नगर निगम परिषद करेगी। यह इसलिए जरूरी है क्योंकि 13 वें वित्त आयोग ने प्रापर्टी टैक्स तय करने के लिए निकायों को स्वतंत्र करने की बात कही है। इसके अलावा नगरपालिक निगम अधिनियम में प्रापर्टी टैक्स से जुड़े प्रावधानों में भी बदलाव करना होगा।


आय के साधन बढ़ाने की जरूरत
पिछले साल भोपाल निगम को प्राॅपर्टी टैक्स से केवल 112 करोड़ रुपए की आय हुई। खुद की आय में गिरावट का नतीजा यह है कि निगम को विभिन्न विकास कार्यों के लिए करीब 200 करोड़ का देनदारी देना है। वहीं निगम कर्मचारियों को समय पर तनख्वाह भी नहीं मिल पा रही है। पिछले महीने तनख्वाह 20 तारीख को हो पाई थी। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए निकायों की आय के साधन बढ़ाया जाना जरूरी है।


आय बढ़ाने के लिए प्राॅपर्टी टैक्स में बदलाव


प्रमुख सचिव, नगरीय आवास एवं विकास संजय दुबे बोले- निकायों की आय बढ़ाने के लिए प्राॅपर्टी टैक्स में बदलाव किया जा रहा है। प्राॅपर्टी टैक्स बोर्ड के माध्यम से मंजूरी के बाद इसे लागू किया जाएगा। हमारी कोशिश है कि यह अगले वित्त वर्ष से लागू हो जाए।


शनिवार को लोक अदालत, बकायादारों को मिलेगी छूट
शनिवार को आयोजित लोक अदालत में नगर निगम के सभी वार्ड और जोन कार्यालयों में शिविर लगाए जाएंगे। इसके अलावा कुछ कालोनियों में भी शिविर लगाए जाएंगे। नगर निगम के उपायुक्त (राजस्व) विनोद शुक्ला ने गुरुवार को सभी जोनल अधिकारियों की मीटिंग में लोक अदालत की तैयारियों को लेकर चर्चा की। बैठक में हर जोन के लिए अलग-अलग टारगेट तय किए गए। निगम ने इस लोक अदालत में 30 करोड़ रुपए वसूली का टारगेट तय किया है।


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